सुबह जो रोटी-सब्ज़ी तुमने खाई, वह शाम तक शरीर का हिस्सा बन जाती है। यह सफ़र है पाचन (Digestion) का। चलो इसे एक सीढ़ी की तरह चढ़ते हैं — नीचे से शुरू, हर पायदान पर थोड़ा और गहरा।
हर पायदान पर टैप करो — वह खुल जाएगा। अपनी कक्षा तक चढ़ो, और जितना समझ आए उतना आगे।
1START
कक्षा 6 तक
पाचन क्या है?▾ टैप करके खोलें
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खाना छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर ऐसी चीज़ बन जाता है जिसे शरीर इस्तेमाल कर सके — इसी को हम पाचन (digestion) कहते हैं। बिना पाचन (digestion) के, खाना सिर्फ पेट में पड़ा रहता, शरीर को कोई फ़ायदा नहीं मिलता।
दाँत खाने को चबाकर छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं। साथ ही मुँह में मौजूद लार (saliva) खाने को नरम और गीला बना देती है, ताकि वह आसानी से निगला जा सके। जीभ स्वाद बताती है और खाने को इधर-उधर घुमाती रहती है।
निवाला निगलते ही वह एक लंबी नली से होकर सीधे पेट तक पहुँच जाता है। यह नली इतनी चतुर है कि निवाला हमेशा सही रास्ते जाता है — साँस की नली में ग़लती से चला जाए तो हमें खाँसी आ जाती है, ताकि वह बाहर निकल जाए।
पेट खाने को ज़ोर से मथता है और उसमें खट्टा रस मिलाता है, जिससे खाना गाढ़े लेप जैसा बन जाता है। कुछ घंटों बाद यह धीरे-धीरे आगे — आंतों — की ओर बढ़ता है।
कक्षा 6 के लिए इतना समझना बहुत बढ़िया है। आगे चढ़ना ज़रूरी नहीं — पर मज़ेदार ज़रूर है!
2DEEPER
कक्षा 9 तक
पाचन तंत्र के अंग▾ टैप करके खोलें
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पूरा पाचन तंत्र (digestive system) असल में मुँह से लेकर शरीर से बाहर तक जाने वाली एक ही लंबी, मुड़ी हुई नली है — करीब 8–9 मीटर लंबी! इसे भोजन-नाल (alimentary canal) कहते हैं।
नली की दीवारों में मांसपेशियाँ होती हैं जो लहर जैसी तरंगों में सिकुड़ती हैं और खाने को आगे धकेलती हैं — इसे क्रमांकुचन (peristalsis) कहते हैं। इसी वजह से खाना लेटकर खाओ तब भी वह नीचे ही जाता है, ऊपर नहीं आता।
आमाशय (stomach) में एक तेज़ अम्ल (acid) और पाचक रस (digestive juice) मिलकर खाने को गाढ़े लेप में बदल देते हैं। यह रस प्रोटीन (protein) को तोड़ना शुरू करता है और साथ आए हानिकारक कीटाणुओं को भी मार देता है।
छोटी आंत (small intestine) में तीन जगह से रस आकर मिलते हैं: खुद आंत से, यकृत (liver) से, और अग्न्याशय (pancreas) से। यहीं कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate), प्रोटीन (protein) और वसा (fat) — तीनों पूरी तरह टूट जाते हैं, और पचा हुआ पोषण खून में सोख लिया जाता है।
जो पचा नहीं, वह बड़ी आंत (large intestine) में पहुँचता है। यहाँ ज़्यादातर पानी सोख लिया जाता है, और बचा हुआ ठोस कचरा मल (faeces) बनकर शरीर से बाहर निकल जाता है।
कक्षा 9 बोर्ड के लिए यह जवाब पूरा है।
3HIGHER
कक्षा 12 तक
पाचन तंत्र कैसे काम करता है?▾ टैप करके खोलें
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खाने में मुख्यतः तीन तरह के बड़े अणु होते हैं — कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate), प्रोटीन (protein) और वसा (fat)। ये अणु इतने बड़े होते हैं कि सीधे खून में नहीं जा सकते — इन्हें छोटी इकाइयों में तोड़ना पड़ता है। यह काम एंजाइम (enzyme) नाम के खास प्रोटीन (protein) करते हैं, जो बड़े अणुओं को तोड़ने में मदद करते हैं।
लार (saliva) में लार एमाइलेज़ (salivary amylase) नाम का एंजाइम (enzyme) होता है, जो स्टार्च (starch) को तोड़ना शुरू कर देता है — इसीलिए रोटी को देर तक चबाने से वह थोड़ी मीठी लगने लगती है। आमाशय (stomach) की दीवार से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) निकलता है, जो निष्क्रिय पेप्सिनोजन (pepsinogen) को सक्रिय पेप्सिन (pepsin) में बदल देता है, जो प्रोटीन (protein) तोड़ना शुरू करता है।
यकृत (liver) से आया पित्त (bile) वसा (fat) की बड़ी बूँदों को छोटी-छोटी बूँदों में तोड़ता है ताकि एंजाइम (enzyme) आसानी से काम कर सकें — पित्त (bile) खुद कोई एंजाइम (enzyme) नहीं है। अग्न्याशय (pancreas) से तीन एंजाइम (enzymes) आते हैं: ट्रिप्सिन (trypsin) — प्रोटीन (protein) तोड़ने वाला, लाइपेज़ (lipase) — वसा (fat) तोड़ने वाला, और अग्न्याशय एमाइलेज़ (pancreatic amylase) — बचा कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) तोड़ने वाला।
छोटी आंत (small intestine) की अंदरूनी दीवार पर लाखों उँगली जैसे उभार होते हैं — विली (villi) — जो सतह का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ा देते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा पोषण जल्दी सोखा जा सके। हर विली (villi) के अंदर बारीक रक्त-वाहिका (blood vessel) होती है जो पचा हुआ पोषण सीधे खून में पहुँचा देती है। इस पूरी प्रक्रिया को अवशोषण (absorption) कहते हैं।
4NEET
प्रतियोगी परीक्षा
परीक्षा की गहराई▾ टैप करके खोलें
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| जगह (Location) | एंजाइम (Enzyme) | किस पर (Substrate) | क्या बनता है (Product) |
|---|---|---|---|
| मुँह | लार एमाइलेज़ (salivary amylase) | स्टार्च (starch) | माल्टोज़ (maltose) |
| आमाशय (stomach) | पेप्सिन (pepsin) | प्रोटीन (protein) | पेप्टोन (peptone) |
| छोटी आंत (small intestine) — अग्न्याशय (pancreas) | ट्रिप्सिन (trypsin) | प्रोटीन/पेप्टाइड (protein/peptide) | अमीनो अम्ल (amino acids) |
| छोटी आंत (small intestine) — अग्न्याशय (pancreas) | लाइपेज़ (lipase) | वसा (fat) | वसा अम्ल + ग्लिसरॉल (fatty acids + glycerol) |
| छोटी आंत (small intestine) — अग्न्याशय (pancreas) | अग्न्याशय एमाइलेज़ (pancreatic amylase) | स्टार्च (starch) | माल्टोज़ (maltose) |
| छोटी आंत (small intestine) की दीवार | माल्टेज़/सुक्रेज़/लैक्टेज़ (maltase/sucrase/lactase) | डाइसैकेराइड (disaccharide) | ग्लूकोज़ आदि (glucose, etc.) |
मुँह में pH लगभग तटस्थ (neutral) (~6.8), आमाशय (stomach) में बेहद अम्लीय (acidic) (~1.5–2.5) — क्योंकि पेप्सिन (pepsin) को अम्लीय (acidic) माहौल चाहिए — और छोटी आंत (small intestine) में क्षारीय (alkaline) (~7.5–8.5), क्योंकि अग्न्याशय (pancreas) से आया बाइकार्बोनेट (bicarbonate) अम्ल (acid) को बेअसर कर देता है। NEET में यह क्रम अक्सर पूछा जाता है।
पाचन (digestion) सिर्फ एंजाइमों (enzymes) से नहीं, हार्मोन (hormone) से भी नियंत्रित होता है। गैस्ट्रिन (gastrin) आमाशय (stomach) से HCl निकलवाता है; सिक्रीटिन (secretin) अग्न्याशय (pancreas) से बाइकार्बोनेट (bicarbonate)-युक्त रस निकलवाता है; कोलिसिस्टोकाइनिन (CCK) पित्ताशय (gallbladder) से पित्त (bile) और अग्न्याशय (pancreas) से एंजाइम (enzymes) निकलवाता है।
तीन शब्द अक्सर मिलते हैं — पाचन (digestion): बड़े अणु तोड़ना; अवशोषण (absorption): टूटे अणुओं का खून में जाना; स्वांगीकरण (assimilation): सोखे गए पोषण का शरीर की कोशिकाओं (cells) में इस्तेमाल होना। बचा कचरा शरीर से बाहर निकलना मलत्याग (egestion) कहलाता है।
टूटे हुए वसा अम्ल (fatty acids) सीधे खून में नहीं, पहले विली (villi) की लसिका वाहिकाओं (lacteals) में जाते हैं, फिर वहाँ से रक्त में मिलते हैं — प्रोटीन (protein) और कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) के रास्ते से अलग। (NEET का प्रिय अंतर-प्रश्न।)
💡 यही पाचन (digestion) का ज्ञान और सवाल भी सुलझाता है
एक सवाल, चार गहराइयाँ
देखा? "खाना पेट में जाकर कहाँ जाता है" — यही छोटा सवाल कक्षा 6 की सीधी कहानी से शुरू होकर एंजाइम (enzymes), हार्मोन (hormones) और परीक्षा-स्तर तक ले गया। एक अच्छा सवाल कभी छोटा नहीं होता — उसमें जितना गहरा उतरो, उतना मिलता है।