एक पल के लिए रुकिए और सिर्फ महसूस कीजिए —
- धीरे से नाक से साँस अंदर लीजिए, फिर बाहर छोड़िए।
- हथेली को मुँह के सामने रखकर उस पर फूँक मारिए।
- हाथ को पंखे की तरह हिलाइए — चेहरे पर हवा महसूस होती है।
- उँगली को पानी के गिलास में डुबोइए, फिर उसे हिलाइए।
- अब वही उँगली मेज़ में घुसाने की कोशिश कीजिए।
- कल्पना कीजिए क्रिकेट की गेंद सीधे आपके घुटने से टकराती है।
इन सब में आप हवा (air), पानी (water) और ठोस (solid) चीज़ों को महसूस कर रहे हैं। तीनों बहुत अलग लगते हैं। लेकिन तीनों में एक ही राज़ छिपा है — और वह हमारी आँखों से दिखाई नहीं देता।
हमारी दुनिया की हर चीज़ बहुत छोटे-छोटे कणों से बनी है — इतने छोटे कि हम उन्हें आँखों से देख भी नहीं सकते। पत्थर भी, पानी भी, और हवा भी। फर्क सिर्फ इतना है कि इन कणों की व्यवस्था अलग-अलग होती है।
एक ही राज़, तीन रूप: ठोस (solid) में कण पास-पास जमे हैं, द्रव (liquid) में पास-पास पर खिसकते हैं, और गैस में दूर-दूर फैले हैं।
इसी व्यवस्था से सब कुछ तय होता है। ठोस (solid) में कण बहुत पास-पास और जमे हुए होते हैं — इसलिए पत्थर कठोर रहता है और अपना आकार बनाए रखता है। द्रव (liquid) में कण पास-पास तो होते हैं पर एक-दूसरे से खिसक सकते हैं — इसलिए पानी बहता है और बर्तन का आकार ले लेता है। गैस में कण बहुत दूर-दूर होते हैं — इसलिए हवा हर जगह फैल जाती है।
सोचिए, घर में खाना बन रहा है और आप दूसरे कमरे में हैं। थोड़ी देर बाद आपको खाने की खुशबू आने लगती है। कैसे?
खुशबू देने वाले पदार्थ के बहुत छोटे कण हवा में फैल जाते हैं। हवा और खुशबू के कण लगातार गति करते हुए धीरे-धीरे अलग-अलग जगहों तक पहुँचते हैं। आखिर उनमें से कुछ हमारी नाक तक पहुँच जाते हैं — और हमें खुशबू आती है। यह एक बड़ा संकेत है कि कण लगातार गति कर रहे हैं।
एक गिलास पानी मेज़ पर रखिए और उसे बिल्कुल मत हिलाइए। पानी पूरी तरह शांत दिखाई देता है। लेकिन उसके कण शांत नहीं हैं — पानी के कण भी लगातार गति करते रहते हैं। हम उन्हें बस अपनी आँखों से नहीं देख पाते।
एक साफ गिलास में पानी भरिए और कुछ देर बिल्कुल शांत रहने दीजिए। अब उसमें रंग की एक बूंद डालिए और देखते रहिए। किसी ने पानी हिलाया नहीं — फिर भी रंग एक जगह नहीं रुका, धीरे-धीरे वह पूरे पानी में अपने आप फैल गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पानी और रंग के कण लगातार गति कर रहे हैं।
यह थोड़ा आश्चर्यजनक है। पत्थर बिल्कुल स्थिर दिखाई देता है — लेकिन उसके कण भी पूरी तरह शांत नहीं होते। पत्थर में कण अपनी जगहों पर मजबूती से जुड़े होते हैं, इसलिए वे पानी या हवा के कणों की तरह इधर-उधर नहीं जा सकते। लेकिन वे अपनी जगह के आसपास बहुत छोटी-सी कंपन (vibration) करते रहते हैं।
तीनों में कण चल रहे हैं — बस अलग-अलग तरीके से: ठोस (solid) में हल्की कंपन (vibration), द्रव (liquid) में सरकना, गैस में हर दिशा में तेज़ भागना।
तो एक बात पक्की हो गई — हर चीज़ के कण चल रहे हैं। ठोस (solid) में कण अपनी जगह पर कंपन (vibration) करते हैं, द्रव (liquid) में एक-दूसरे के पास से सरकते हैं, और गैस में हर दिशा में तेज़ी से भागते हैं।
धूप में पानी जल्दी क्यों सूखता है? गरम खाने की खुशबू जल्दी क्यों फैलती है? गरम पानी में चीज़ें जल्दी क्यों घुलती हैं? इन सबमें एक चीज़ समान है — गर्मी।
अब तक हमने दो बातें समझ ली हैं: हवा, पानी और पत्थर कणों से बने हैं; और ये कण हमेशा गति करते रहते हैं। अब समझते हैं — किसी चीज़ को गर्म करने पर उसके कणों का क्या होता है।
दो छोटी कटोरियों में बराबर पानी रखिए। एक कटोरी धूप में रखिए, दूसरी छाया में। कुछ घंटों बाद देखिए — किस कटोरी में पानी ज्यादा कम हुआ? अक्सर धूप वाली कटोरी में पानी जल्दी कम होता है। पानी गायब नहीं हुआ — उसका कुछ हिस्सा हवा में चला गया।
दो गिलास लीजिए — एक में ठंडा पानी, दूसरे में गर्म पानी। दोनों में खाने के रंग की एक-एक बूंद डालिए और हिलाइए मत। देखिए रंग किस गिलास में जल्दी फैलता है। आमतौर पर गर्म पानी में रंग ज्यादा तेज़ी से फैलता है।
क्यों? क्योंकि गर्म पानी के कण ठंडे पानी के कणों की तुलना में ज्यादा तेज़ी से गति कर रहे होते हैं।
एक ही पानी, दो हाल: ठंडे में कण धीरे चलते हैं (छोटे तीर), गर्म में तेज़ (लंबे तीर)।
इससे एक बहुत आसान नियम बनता है — ज्यादा गर्म, तो कणों की ज्यादा गति; ज्यादा ठंडा, तो कणों की कम गति।
किसी पदार्थ को गर्म करने पर उसके कणों को ऊर्जा (energy) मिलती है। इसी ऊर्जा के कारण उनकी गति बढ़ जाती है। गर्मी बढ़ी तो कणों की गति बढ़ी; गर्मी कम हुई तो कणों की गति कम हुई।
धूप में जमीन गर्म होती है, और जमीन के पास की हवा भी गर्म हो जाती है। गर्म हवा के कण ज्यादा तेज़ी से गति करते हैं और आसपास की चीज़ों तथा एक-दूसरे से टकराते रहते हैं।
और पत्थर? पत्थर के कण तो अपनी जगह से हट नहीं सकते — लेकिन गर्म करने पर उनकी कंपन (vibration) बढ़ जाती है। इसलिए ठोस (solid) पदार्थों के कण भी गर्म करने पर ज्यादा गति करते हैं।
गीला कपड़ा धूप में डालने पर सूख जाता है। हम कहते हैं "पानी सूख गया" — लेकिन पानी गायब नहीं हुआ। पानी के कण लगातार गति कर रहे हैं, और सतह के कुछ कण पानी से निकलकर हवा में चले जाते हैं। धूप से पानी गर्म होता है, कणों की गति बढ़ती है, और और भी ज्यादा कण सतह से निकल पाते हैं। पानी के इसी तरह भाप बनकर उड़ने को वाष्पीकरण (evaporation) कहते हैं।
गर्मी के दिन एक बहुत ठंडी पानी की बोतल बाहर निकालिए। कुछ देर बाद उसकी बाहरी सतह पर छोटी-छोटी पानी की बूंदें दिखाई देने लगती हैं। क्या पानी बोतल के अंदर से बाहर निकल आया? नहीं। हमारे आसपास की हवा में पहले से पानी भाप के रूप में मौजूद होता है। ठंडी सतह के पास यह भाप ठंडी होकर वापस छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है। भाप के इस तरह वापस पानी बनने को संघनन (condensation) कहते हैं।
अब एक बहुत बड़ी प्राकृतिक घटना समझ में आने लगती है। सूरज समुद्र, तालाब, नदी और जमीन के पानी को गर्म करता है। पानी का कुछ हिस्सा भाप बनकर ऊपर हवा में चला जाता है — और फिर ऊपर ठंडा होकर बादल और बारिश बन जाता है।
वाष्पीकरण (evaporation) और संघनन (condensation) मिलकर बादल और बारिश बनाते हैं — वही राज़, बहुत बड़े पैमाने पर।
गर्मी कणों की गति बढ़ाती है, ठंडक घटाती है — और इसी से बर्फ, पानी और भाप एक-दूसरे में बदलते हैं।
पूरा पाठ एक नज़र में — कण किन चीज़ों में हैं, वे क्या करते हैं, गर्मी का असर, और रूप बदलना।
1पत्थर, पानी और हवा — तीनों इतने अलग हैं, फिर इनमें एक जैसा क्या है?▾
2पत्थर अपना आकार बनाए रखता है, पर पानी बर्तन का आकार ले लेता है — क्यों?▾
3रसोई में खाना बनता है और खुशबू दूसरे कमरे तक कैसे पहुँच जाती है?▾
4शांत रखे पानी में रंग की एक बूंद बिना हिलाए भी अपने आप क्यों फैल जाती है?▾
5गर्म पानी में चीनी या रंग ठंडे पानी से जल्दी क्यों घुलता है?▾
6गीला कपड़ा धूप में सूख जाता है — पानी आखिर जाता कहाँ है?▾
7गर्मी में ठंडी बोतल बाहर रखते ही उस पर पानी की बूंदें कहाँ से आ जाती हैं?▾
8जब हम कहते हैं कोई चीज़ “गर्म” है, तो असल में कणों के साथ क्या हो रहा होता है?▾
अब तक कणों की कहानी — तीन बड़ी बातें
1. हर पदार्थ (matter) बहुत छोटे-छोटे कणों से बना है — पत्थर, पानी और हवा, सब।
2. ये कण कभी नहीं रुकते — वे हमेशा गति करते रहते हैं।
3. गर्म करने पर कणों की गति बढ़ती है, और ठंडा करने पर घटती है।
और यहीं एक सुंदर बात छिपी है: जब हम कहते हैं कोई चीज़ "गर्म" है, तो असल में हम कह रहे होते हैं कि उसके कण तेज़ चल रहे हैं। कणों की इसी गति को तापमान (temperature) कहते हैं।
यही अनदेखी गति समझा देती है कि खुशबू क्यों फैलती है, गीला कपड़ा क्यों सूखता है, और बादल तथा बारिश कैसे बनते हैं।