यह छोटा-सा सवाल असल में एक बड़े विषय का दरवाज़ा है — प्रकाश (Light)। चलो इसे एक सीढ़ी की तरह चढ़ते हैं: नीचे से शुरू, हर पायदान पर थोड़ा और गहरा।
हर पायदान पर टैप करो — वह खुल जाएगा। अपनी कक्षा तक चढ़ो, और जितना समझ आए उतना आगे।
1START
कक्षा 6 तक
प्रकाश क्या है?▾ टैप करके खोलें
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रात को कमरे की बत्ती बुझा दो — कुछ नहीं दिखता। बत्ती जलाओ — सब दिख जाता है। मतलब, देखने के लिए प्रकाश ज़रूरी है। प्रकाश ही वह चीज़ है जो हमें दुनिया दिखाती है।
कुछ चीज़ें अपना प्रकाश खुद बनाती हैं — सूरज (सबसे बड़ा स्रोत), आग, दीया, बल्ब, मोमबत्ती। पर चाँद अपना प्रकाश नहीं बनाता — वह सिर्फ सूरज की रोशनी को लौटाता (परावर्तित करता) है।
प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में चलता है। इसीलिए जब कोई चीज़ रास्ते में आती है, तो उसके पीछे परछाई (shadow) बन जाती है — प्रकाश मुड़कर पीछे नहीं जा पाता। इसी वजह से हम दीवार के पार नहीं देख सकते।
सूरज या बल्ब का प्रकाश किसी चीज़ पर पड़ता है, वहाँ से टकराकर हमारी आँख में आता है — तभी वह चीज़ हमें दिखती है। इसलिए अँधेरे में, जब प्रकाश ही नहीं, तो कुछ नहीं दिखता।
सूरज की रोशनी सफेद दिखती है, पर बारिश के बाद आसमान में इंद्रधनुष देखो — उसमें सात रंग होते हैं! पानी की बूँदें सफेद रोशनी को उसके अलग-अलग रंगों में बाँट देती हैं। मतलब, सफेद रोशनी असल में कई रंगों का मेल है।
कक्षा 6 के लिए इतना समझना बहुत बढ़िया है। आगे चढ़ना ज़रूरी नहीं — पर मज़ेदार ज़रूर है!
2DEEPER
कक्षा 9 तक
रोशनी मुड़ती है, बिखरती है▾ टैप करके खोलें
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जब प्रकाश किसी चिकनी सतह (जैसे शीशा या शांत पानी) से टकराता है, तो वह वापस लौट जाता है — इसे परावर्तन कहते हैं। इसीलिए आईने में हमें अपना चेहरा दिखता है।
गिलास के पानी में रखी चम्मच टूटी हुई क्यों दिखती है? क्योंकि प्रकाश जब हवा से पानी में जाता है, तो थोड़ा मुड़ जाता है — इसे अपवर्तन कहते हैं। इसी वजह से तालाब असल से कम गहरा दिखता है।
एक काँच के प्रिज़्म में से सफेद रोशनी गुज़ारो — वह सात रंगों में बँट जाती है: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। इसी को विक्षेपण (dispersion) कहते हैं, और इंद्रधनुष भी यही है — आसमान में पानी की बूँदें प्रिज़्म का काम करती हैं।
हवा नन्हे-नन्हे कणों से भरी है। जब सूरज की रोशनी इनसे टकराती है, तो रोशनी चारों ओर बिखर जाती है (scattering)। इन कणों से नीला रंग सबसे ज़्यादा बिखरता है और पूरे आसमान में फैल जाता है — इसलिए आसमान नीला दिखता है।
शाम को सूरज की रोशनी को हवा की बहुत मोटी परत पार करनी पड़ती है। तब तक नीला सारा बिखर चुका होता है, सिर्फ लाल-नारंगी बचकर हमारी आँख तक आता है।
कक्षा 9 के बोर्ड स्तर के लिए तुम्हारा जवाब पूरा है।
3HIGHER
कक्षा 12 तक
रोशनी असल में क्या है?▾ टैप करके खोलें
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प्रकाश एक विद्युत-चुम्बकीय तरंग (electromagnetic wave) है — एक लहर जिसे चलने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं। इसीलिए सूरज की रोशनी अंतरिक्ष के खाली शून्य को पार करके हम तक पहुँच जाती है।
हर रंग एक खास तरंगदैर्ध्य (wavelength, λ) की लहर है। दिखने वाला प्रकाश लगभग 400 nm (बैंगनी) से 700 nm (लाल) तक होता है। नीला छोटी तरंगदैर्ध्य का है, लाल बड़ी तरंगदैर्ध्य का। (1 nm = एक मीटर का अरबवाँ हिस्सा।)
यही है असली कारण: हवा के नन्हे कण छोटी तरंगदैर्ध्य को कहीं ज़्यादा ज़ोर से बिखेरते हैं। नीला छोटी तरंगदैर्ध्य का है, इसलिए वह लाल से बहुत ज़्यादा बिखरता है। इसी को रैले प्रकीर्णन (Rayleigh scattering) कहते हैं — नीले आसमान की गहरी वजह।
प्रकाश काँच या पानी में धीमा हो जाता है, और इसी से मुड़ता है। यह "कितना धीमा" अपवर्तनांक n = c/v से नापते हैं। अलग-अलग रंग अलग मात्रा में मुड़ते हैं — इसीलिए प्रिज़्म रंगों को अलग कर देता है।
हैरानी की बात: प्रकाश सिर्फ तरंग नहीं, छोटे-छोटे ऊर्जा के पैकेट भी है, जिन्हें फोटॉन (photon) कहते हैं। यानी प्रकाश तरंग भी है और कण भी — यह कहानी अगले पायदान पर पूरी होती है।
4NEET·JEE
प्रतियोगी परीक्षा
परीक्षा की गहराई▾ टैप करके खोलें
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बिखराव की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है। नीला (~450 nm) बनाम लाल (~700 nm): अनुपात ≈ (700/450)⁴ ≈ 5.8। यानी नीला, लाल से लगभग 5–6 गुना ज़्यादा बिखरता है — यही नीले आसमान का गणितीय जवाब।
बैंगनी की तरंगदैर्ध्य तो और भी छोटी है! पर — सूरज बैंगनी कम भेजता है, हमारी आँख बैंगनी के प्रति कम संवेदनशील है, और कुछ बैंगनी ऊपरी वायुमंडल में सोख लिया जाता है। इन सबका मेल हमें नीला दिखाता है।
दिखने वाला प्रकाश एक बड़े परिवार का छोटा-सा हिस्सा है। बढ़ती ऊर्जा के क्रम में: रेडियो → माइक्रोवेव → अवरक्त (IR) → दृश्य प्रकाश → पराबैंगनी (UV) → X-किरण → गामा। तरंगदैर्ध्य घटती जाती है, आवृत्ति और ऊर्जा बढ़ती जाती है।
छोटी तरंगदैर्ध्य = ज़्यादा ऊर्जा वाला फोटॉन — इसीलिए UV त्वचा जला देता है पर दृश्य प्रकाश नहीं। आइंस्टाइन ने दिखाया कि प्रकाश किसी धातु से इलेक्ट्रॉन तभी निकालता है जब फोटॉन की ऊर्जा कार्य-फलन (work function) से ज़्यादा हो — यह सिद्ध करता है कि प्रकाश ऊर्जा के पैकेटों (फोटॉन) में आता है। (NEET/JEE का प्रिय प्रश्न।)
व्यतिकरण और विवर्तन (interference, diffraction) साबित करते हैं कि प्रकाश तरंग है; प्रकाश-विद्युत प्रभाव साबित करता है कि वह कण है। दोनों सच हैं — इसी को तरंग-कण द्वैतता (wave–particle duality) कहते हैं, आधुनिक भौतिकी की नींव।
💡 यही प्रकाश का ज्ञान और सवाल भी सुलझाता है
एक सवाल, चार गहराइयाँ
देखा? "आसमान नीला क्यों है" — यही छोटा सवाल कक्षा 6 की परछाई से शुरू होकर तरंगों, फोटॉनों और परीक्षा-स्तर तक ले गया। एक अच्छा सवाल कभी छोटा नहीं होता — उसमें जितना गहरा उतरो, उतना मिलता है।