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स्तर 1 · रंग · COLOURS

🌈 चीज़ें अलग-अलग रंग की क्यों दिखती हैं?

Why do things look different colours?

एक पल रुककर सोचिए —

इन सारे सवालों का जवाब एक ही जगह छिपा है — खुद रोशनी में।

एक बात हमेशा याद रखिए, क्योंकि यही इस पूरे पाठ की चाबी है: जिस रोशनी को हम देखते हैं, उसमें कई रंग एक साथ भरे (packed) होते हैं। अब जब यह रोशनी किसी चीज़ पर पड़ती है या किसी चीज़ में से गुज़रती है, तो हर रंग उसके साथ थोड़ा अलग-अलग बर्ताव करता है — कोई ज़्यादा मुड़ता है, कोई कम; कोई ज़्यादा बिखरता है, कोई कम; कोई वापस लौट आता है, कोई सोख लिया जाता है। बस इसी अंतर से दुनिया के सारे रंग बनते हैं। आइए एक-एक करके यह कहानी समझें।

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सफ़ेद रोशनी में सारे रंग छिपे हैंWhite light hides all colours

क्या सफ़ेद रोशनी सच में "सफ़ेद" होती है? जवाब है — नहीं। सूरज या बल्ब से आने वाली सफ़ेद रोशनी असल में सात अलग-अलग रंगों की रोशनी का मिला-जुला रूप है। ये सातों रंग हमेशा साथ-साथ चलते हैं, इसलिए हमें अलग-अलग नहीं, बल्कि मिलकर सफ़ेद दिखते हैं।

जब सफ़ेद रोशनी एक काँच के त्रिकोण — जिसे प्रिज़्म (prism) कहते हैं — में से गुज़रती है, तो हर रंग थोड़ा अलग मात्रा में मुड़ता है और सारे रंग अलग होकर एक पट्टी के रूप में दिखने लगते हैं। नीचे की तस्वीर में यही हो रहा है।

प्रिज़्म से गुज़रकर सफ़ेद रोशनी सात रंगों में बँटती हुई

सफ़ेद रोशनी (white light) प्रिज़्म (prism) में से गुज़रते ही सात रंगों में बँट जाती है — लाल (red), नारंगी (orange), पीला (yellow), हरा (green), नीला (blue), जामुनी (indigo) और बैंगनी (violet)। इन्हें याद रखने के लिए अंग्रेज़ी में VIBGYOR कहते हैं।

🥛 करके देखो

एक साफ़ गिलास को पानी से भरकर धूप में इस तरह पकड़िए कि रोशनी उसके किनारे से होकर सामने सफ़ेद दीवार या कागज़ पर पड़े। ध्यान से देखिए — दीवार पर हल्के इंद्रधनुषी रंग की एक पतली रेखा दिख सकती है। पानी से भरा गिलास भी एक छोटे प्रिज़्म (prism) जैसा काम करता है।

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चीज़ें अलग-अलग रंग की क्यों दिखती हैंWhy objects show different colours

अब मुख्य सवाल पर आते हैं। जब किसी चीज़ पर सफ़ेद रोशनी (यानी सारे रंग एक साथ) पड़ती है, तो वह चीज़ ज़्यादातर रंगों को अपने अंदर सोख लेती है — इसे अवशोषण (absorption) कहते हैं — और सिर्फ़ एक रंग को वापस लौटा देती है — इसे परावर्तन (reflection) कहते हैं। यही लौटा हुआ रंग हमारी आँख तक पहुँचता है, और हमें चीज़ उसी रंग की दिखती है।

नीचे की तस्वीर में सफ़ेद रोशनी के सारे रंग सेब पर पड़ते हैं। सेब लाल को छोड़कर बाकी सब रंग सोख लेता है और सिर्फ़ लाल रंग परावर्तित (reflect) करता है — इसीलिए सेब लाल दिखता है। इसी तरह हरी पत्ती हरा रंग लौटाती है, और पीला नींबू पीला।

सेब पर सफ़ेद रोशनी पड़ती है और सिर्फ़ लाल रंग आँख तक लौटता है

सफ़ेद रोशनी के सारे रंग सेब पर पड़ते हैं। सेब लाल (red) को छोड़कर बाकी सब रंग अवशोषित (absorb) कर लेता है और सिर्फ़ लाल रंग परावर्तित (reflect) होकर आँख तक पहुँचता है — इसीलिए सेब लाल दिखता है।

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काला और सफ़ेद कपड़ाBlack and white cloth

अब सोचिए — कोई चीज़ पूरी तरह सफ़ेद या पूरी तरह काली क्यों दिखती है? सफ़ेद चीज़ सारे रंगों को परावर्तित (reflect) कर देती है — कोई रंग सोखा नहीं जाता, इसलिए सारे रंग मिलकर सफ़ेद दिखते हैं। काली चीज़ इसका उल्टा करती है — वह लगभग सारे रंगों को अवशोषित (absorb) कर लेती है, बहुत कम रोशनी वापस लौटती है, इसलिए वह काली दिखती है।

👕 करके देखो

एक काला और एक सफ़ेद कपड़ा (या कागज़) कुछ मिनट तेज़ धूप में रखिए, फिर दोनों को हाथ से छूकर देखिए — काला कपड़ा ज़्यादा गर्म लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि काला कपड़ा रोशनी की ऊर्जा को अवशोषित (absorb) करके गर्मी में बदल लेता है, जबकि सफ़ेद कपड़ा उसे परावर्तित (reflect) कर देता है। इसीलिए गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े ठंडक देते हैं।

परावर्तित (reflected) अवशोषित (absorbed) सफ़ेद कपड़ा (white cloth) काला कपड़ा (black cloth) ठंडा रहता है (stays cool) गर्म हो जाता है (gets hot) इसीलिए गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े ठंडक देते हैं।

सफ़ेद कपड़ा रोशनी को परावर्तित (reflect) करके ठंडा रहता है, काला कपड़ा रोशनी को अवशोषित (absorb) करके गर्मी में बदल लेता है और गर्म हो जाता है।

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इंद्रधनुष कैसे बनता हैHow a rainbow forms

पिछले पाठ (रोशनी) में हमने देखा था कि पानी में रखा सीधा चम्मच टेढ़ा क्यों दिखता है — क्योंकि रोशनी पानी में जाते ही थोड़ी मुड़ जाती है। इसी मुड़ने को अपवर्तन (refraction) कहते हैं। इंद्रधनुष (rainbow) भी इसी अपवर्तन (refraction) से बनता है।

बारिश के बाद हवा में पानी की छोटी-छोटी बूंदें तैरती रहती हैं। जब सूरज की सफ़ेद रोशनी किसी बूंद में घुसती है, तो वह अपवर्तित (refract) होकर मुड़ती है, और हर रंग थोड़ा अलग मुड़ने से बूंद के अंदर ही सात रंगों में बँट जाती है — ठीक प्रिज़्म (prism) की तरह। ये रंग बूंद की भीतरी दीवार से परावर्तित (reflect) होकर बाहर निकलते हैं। आसमान में लाखों बूंदों के साथ यह एक साथ होता है, और हमें बड़ा इंद्रधनुष (rainbow) दिखता है।

💦 करके देखो

अगली बार धूप निकली हो, तो सूरज की तरफ़ पीठ करके बगीचे की नली, हैंडपंप या बाल्टी से पानी की हल्की फुहार हवा में उछालिए — आपको अपना खुद का छोटा इंद्रधनुष दिख सकता है!

सूरज की रोशनी (sunlight) अपवर्तन (refraction) + परावर्तन (reflection) बूंद (raindrop) रंगों में बँटकर बाहर — यही इंद्रधनुष (rainbow) बनाता है।

सूरज की रोशनी बूंद में घुसकर अपवर्तित (refracted) होती है, अंदर परावर्तित (reflected) होकर मुड़ती है, और रंगों में बँटकर बाहर निकलती है — यही इंद्रधनुष (rainbow) बनाता है।

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आसमान दिन में नीला, शाम को लाल क्योंWhy the sky is blue by day and red at dusk

एक और रोज़मर्रा का जादू। हमने अभी देखा कि सफ़ेद रोशनी में सात रंग भरे होते हैं। अब जब यह रोशनी हवा में से गुज़रती है, तो हवा के छोटे-छोटे कण इन रंगों को हर दिशा में बिखेर देते हैं — इसे प्रकीर्णन (scattering) कहते हैं। सबसे ख़ास बात यह है कि नीला रंग बहुत ज़्यादा बिखरता (scatter) है, जबकि लाल और नारंगी रंग बहुत कम बिखरते हैं और ज़्यादातर सीधे आगे बढ़ जाते हैं।

सूरज को देखना बनाम आसमान को देखना

यह अंतर समझना सबसे ज़रूरी है। जब हम सीधे सूरज की तरफ़ देखते हैं, तो उसके सारे रंग एक साथ मिलकर सीधे हमारी आँखों तक पहुँचते हैं — इसलिए सूरज हमें सफ़ेद या हल्का पीला दिखता है। पर जब हम सूरज से हटकर खाली आसमान की तरफ़ देखते हैं, तब हम सूरज की सीधी रोशनी नहीं देख रहे होते — हम हवा में इधर-उधर बिखरे हुए नीले रंग को देख रहे होते हैं। इसीलिए दिन में पूरा आसमान नीला दिखाई देता है।

दिन में बिखरा हुआ नीला रंग पूरे आसमान में फैलकर आसमान को नीला दिखाता है

दिन में सूरज की रोशनी हवा के कणों से टकराती है और नीला रंग हर दिशा में बिखर जाता है। जब हम खाली आसमान की तरफ़ देखते हैं, तो यही बिखरा हुआ नीला रंग हमें दिखता है — इसलिए आसमान नीला लगता है।

शाम को आसमान लाल-नारंगी क्यों?

शाम के समय सूरज नीचे, क्षितिज के पास चला जाता है। तब उसकी रोशनी को हम तक पहुँचने के लिए हवा में एक बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है — दोपहर के मुक़ाबले कई गुना लंबा।

दोपहर में रोशनी का रास्ता छोटा, शाम को बहुत लंबा

दोपहर में सूरज ऊपर होता है, इसलिए उसकी रोशनी को हवा का छोटा रास्ता पार करना पड़ता है। शाम को सूरज नीचे चला जाता है और रोशनी को हवा का बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

इस लंबे रास्ते में सारा नीला रंग बहुत पहले ही बिखरकर (scatter) रास्ते में ही छूट जाता है — वह हमारी आँखों तक पहुँच ही नहीं पाता। सिर्फ़ लाल और नारंगी रंग, जो कम बिखरते हैं, इस लंबे रास्ते को पार करके हम तक पहुँच पाते हैं। इसीलिए शाम के समय सूरज और आसमान लाल-नारंगी दिखाई देते हैं।

शाम को लंबे रास्ते में नीला बिखर जाता है और सिर्फ़ लाल-नारंगी रंग observer तक पहुँचता है

शाम को लंबे रास्ते में नीला और जामुनी रंग बिखरकर रास्ते में ही छूट जाते हैं, और सिर्फ़ लाल व नारंगी-पीला रंग बचकर हम तक पहुँचता है — इसलिए शाम का आसमान लाल-नारंगी दिखता है।

संक्षेप में: दिन में हम आसमान में हवा से बिखरा हुआ नीला रंग देखते हैं; शाम को नीला रंग लंबे रास्ते में ही खत्म हो जाता है, इसलिए सिर्फ़ लाल-नारंगी रंग हम तक पहुँचता है।

📚 और गहराई चाहिए?

इस सवाल की पूरी गहराई — कक्षा 12 और NEET स्तर तक — हमारी गहराई की सीढ़ी वाले पाठ में है: 💡 आसमान नीला क्यों दिखता है? — प्रकाश (कक्षा 5 से NEET तक)

रंग (colour) सफ़ेद रोशनी में सारे रंग प्रिज़्म (prism) से गुज़रकर सफ़ेद रोशनी सात रंगों में बँट जाती है। वस्तु का रंग परावर्तन (reflection) व अवशोषण (absorption) से रंग तय होता है। काला-सफ़ेद कपड़ा सफ़ेद ठंडा रहता है, काला रोशनी सोखकर गर्म हो जाता है। इंद्रधनुष (rainbow) बूंद में अपवर्तन (refraction) से रंग अलग-अलग मुड़ जाते हैं। आसमान का रंग प्रकीर्णन (scattering) से दिन में नीला, शाम को नारंगी-लाल दिखता है।

पूरा पाठ — एक नज़र में: रंग रोशनी और हमारी आँखों के बीच के खेल से बनते हैं — परावर्तन (reflection), अवशोषण (absorption), अपवर्तन (refraction) और प्रकीर्णन (scattering), सबकी अपनी-अपनी भूमिका है।

🧠 अपने आप को परखो
हर सवाल पर टैप करो — जवाब अपने आप खुल जाएगा। पहले खुद सोचो, फिर देखो।
1सफ़ेद रोशनी असल में किस रंग की बनी होती है?▾
सफ़ेद रोशनी असल में सात अलग-अलग रंगों — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी — की रोशनी का मिला-जुला रूप है। ये सब मिलकर हमें सफ़ेद दिखते हैं।
2लाल सेब हमें लाल क्यों दिखता है?▾
लाल सेब सफ़ेद रोशनी में से बाकी सारे रंगों को अवशोषित (absorb) कर लेता है और सिर्फ़ लाल रंग को परावर्तित (reflect) करता है। यही लौटा हुआ लाल रंग हमारी आँख तक पहुँचता है।
3धूप में सफ़ेद कपड़ा ठंडा और काला कपड़ा गर्म क्यों लगता है?▾
सफ़ेद कपड़ा लगभग सारी रोशनी को परावर्तित (reflect) कर देता है, इसलिए ठंडा रहता है। काला कपड़ा लगभग सारी रोशनी को अवशोषित (absorb) करके गर्मी में बदल देता है, इसलिए गर्म हो जाता है।
4इंद्रधनुष बनने के लिए किन दो चीज़ों की ज़रूरत होती है?▾
सूरज की रोशनी और हवा में मौजूद पानी की छोटी-छोटी बूंदें — दोनों का साथ होना ज़रूरी है।
5रोशनी पानी की बूंद में जाकर क्यों मुड़ जाती है, और रंग अलग क्यों हो जाते हैं?▾
रोशनी जब हवा से पानी में जाती है तो उसकी दिशा थोड़ी बदल जाती है — इसे अपवर्तन (refraction) कहते हैं। हर रंग थोड़ा अलग मात्रा में मुड़ता है, इसलिए बूंद के अंदर रंग अलग-अलग हो जाते हैं।
6जब हम सीधे सूरज को देखते हैं तो वह सफ़ेद या हल्का पीला क्यों दिखता है?▾
क्योंकि तब सूरज के सारे रंग एक साथ मिलकर सीधे हमारी आँखों तक पहुँचते हैं। सारे रंग मिलकर सफ़ेद या हल्का पीला दिखते हैं।
7दिन में पूरा आसमान नीला क्यों दिखता है?▾
हवा के कण नीले रंग को सबसे ज़्यादा बिखेरते (scatter) हैं। जब हम सूरज से हटकर खाली आसमान की तरफ़ देखते हैं, तो हमें यही हवा में बिखरा हुआ नीला रंग दिखता है — इसलिए आसमान नीला लगता है।
8शाम को आसमान लाल-नारंगी क्यों हो जाता है?▾
शाम को सूरज नीचे होने से रोशनी को हवा का बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस लंबे रास्ते में नीला रंग पहले ही बिखरकर रास्ते में छूट जाता है, और सिर्फ़ लाल-नारंगी रंग बचकर हम तक पहुँचता है।
9क्या अंधेरे कमरे में किसी चीज़ का रंग दिखाई देगा?▾
नहीं। रंग दिखने के लिए चीज़ पर रोशनी पड़ना ज़रूरी है, तभी वह कोई रंग परावर्तित (reflect) कर पाएगी। अंधेरे में लौटाने के लिए कोई रोशनी ही नहीं होती, इसलिए कोई रंग नहीं दिखता।
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रंग की कहानी — बड़ी बातें

1. सफ़ेद रोशनी असल में सात रंगों का मिला-जुला रूप है। प्रिज़्म (prism) या पानी की बूंद में मुड़कर (अपवर्तन / refraction) यह अपने अलग-अलग रंगों में बँट जाती है, जैसे इंद्रधनुष (rainbow) में दिखता है।

2. कोई भी चीज़ जिस रंग की दिखती है, वह उसी रंग को परावर्तित (reflect) करती है और बाकी रंग अवशोषित (absorb) कर लेती है। सफ़ेद चीज़ सब लौटाती है, काली चीज़ सब सोख लेती है।

3. हवा के कण नीले रंग को सबसे ज़्यादा बिखेरते (scatter) हैं। दिन में हम आसमान में यही बिखरा नीला रंग देखते हैं; शाम को लंबे रास्ते में नीला रंग खत्म हो जाता है और सिर्फ़ लाल-नारंगी रंग हम तक पहुँचता है।

और यह सबसे सुंदर बात: रंग असल में चीज़ों के अंदर नहीं, रोशनी और हमारी आँखों के बीच के इस खेल में छिपे हैं — बिना रोशनी के दुनिया का कोई भी रंग नहीं दिखेगा।

➜हम साँस लेते हैं, पतंग उड़ती है, आवाज़ हम तक पहुँचती है — पर हवा दिखती क्यों नहीं? हवा की यह कहानी हम अगले पाठ में खोलेंगे।
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